नई दिल्ली:
भारत में बढ़ते प्लास्टिक कचरे की समस्या को अवसर में बदलने के उद्देश्य से “ऑपरेशन शुद्धि” नामक एक राष्ट्रीय पहल की शुरुआत की जा रही है। यह अभियान प्लास्टिक कचरे को व्यवस्थित तरीके से औद्योगिक कच्चे माल में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस मिशन का उद्देश्य प्लास्टिक को कचरा नहीं बल्कि एक मूल्यवान संसाधन के रूप में स्थापित करना है।
इस पहल के तहत मीडिया को दिल्ली स्थित मालवीय स्मृति भवन, दीन दयाल उपाध्याय मार्ग में आयोजित कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया, जहां इस परियोजना की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की गई।
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विशेषज्ञों के अनुसार भारत हर साल लाखों टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न करता है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कचरे के संग्रहण, अलगाव और पुनर्चक्रण की एक व्यवस्थित प्रणाली का अभाव है। ऑपरेशन शुद्धि इसी समस्या का समाधान प्रस्तुत करता है। इस मॉडल के माध्यम से उपयोग के बाद फेंके गए प्लास्टिक को उच्च गुणवत्ता वाले औद्योगिक कच्चे माल में बदला जाएगा, जिससे 100 प्रतिशत वर्जिन प्लास्टिक के उपयोग को कम किया जा सकेगा।
इस पहल की एक और खासियत यह है कि इससे तैयार सामग्री की लागत पारंपरिक प्लास्टिक की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत तक कम हो सकती है। इसके साथ ही देशभर में विकेंद्रीकृत संग्रहण और रीसाइक्लिंग प्रणाली विकसित करने की भी योजना है, जिससे रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि होगी।
इस मिशन से जुड़े पदाधिकारियों का मानना है कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक विकास को भी नई दिशा दे सकती है। अगर यह मॉडल सफल होता है, तो भारत में कचरे को संसाधन में बदलने का एक बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है।



