महिलाओं के मासिक धर्म यानी पीरियड्स को लेकर समाज में फैली झिझक और सामाजिक कलंक को खत्म करने की मांग एक बार फिर संसद में उठी है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद Raghav Chadha ने संसद में इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
संसद में बोलते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि आज भी भारत में पीरियड्स को लेकर खुलकर बात नहीं की जाती। कई जगहों पर महिलाएं और लड़कियां इस विषय पर शर्म और संकोच महसूस करती हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल स्वास्थ्य का नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता का भी मुद्दा है।
राघव चड्ढा ने सुझाव दिया कि स्कूलों और कॉलेजों में मेंस्ट्रुअल हेल्थ पर विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाएं, ताकि किशोरियों और युवाओं को सही जानकारी मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को पीरियड्स से जुड़े मिथकों और गलत धारणाओं को खत्म करने के लिए बड़े स्तर पर शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रम शुरू करने चाहिए।
इसके अलावा उन्होंने मेंस्ट्रुअल हाइजीन प्रोडक्ट्स को अधिक सुलभ और किफायती बनाने की भी बात कही। उनका मानना है कि ग्रामीण और गरीब वर्ग की महिलाओं को सस्ती और सुरक्षित सैनिटरी सुविधाएं उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।
सांसद ने कहा कि जब तक समाज पीरियड्स को एक सामान्य जैविक प्रक्रिया के रूप में स्वीकार नहीं करेगा, तब तक महिलाओं की सेहत और सम्मान से जुड़े कई मुद्दे अधूरे रहेंगे।
राघव चड्ढा के इस बयान के बाद संसद और सोशल मीडिया दोनों जगह इस विषय पर चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों ने इसे महिलाओं की स्वास्थ्य और गरिमा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है।



