Sunday, August 2, 2026

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सावन में दूधेश्वरनाथ मंदिर की महिमा: कांवड़ यात्रा का महत्व, शिव कृपा और सनातन धर्म

सावन में कांवड़ यात्रा का महत्व, दूधेश्वरनाथ मंदिर का इतिहास, भगवान शिव की महिमा, गाजियाबाद मंदिर कॉरिडोर और संत समाज का संदेश। पढ़ें पूरी खबर

गाजियाबाद। सावन का पावन महीना भगवान शिव की आराधना का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती पृथ्वी लोक पर भक्तों को आशीर्वाद देने आते हैं। इसी कारण लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा कर पवित्र गंगाजल लाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से जल चढ़ाने वाले भक्तों की मनोकामनाएं भगवान शिव पूर्ण करते हैं और माता पार्वती परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष का पान भगवान शिव ने किया था। विष की तपिश को शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर गंगाजल अर्पित किया था। तभी से सावन में जलाभिषेक की परंपरा विशेष महत्व रखती है।

गाजियाबाद स्थित दूधेश्वरनाथ मठ को अत्यंत प्राचीन और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार रावण के पिता महर्षि विश्रवा ने यहां भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी, जिसके बाद भगवान शिव पिंडी स्वरूप में यहां विराजमान हुए। यहां 28 संतों की समाधियां भी स्थित हैं। वर्तमान में मठ के महंत नारायण गिरि जी महाराज श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन कर रहे हैं।

हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिर परिसर का दौरा कर कॉरिडोर निर्माण कार्यों की समीक्षा की थी। प्रशासन के अनुसार मंदिर के विकास और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए विशेष कार्य किए जा रहे हैं। सावन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस, प्रशासन और नगर निगम की टीमें लगातार तैनात हैं।

राजनीतिक घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए संत समाज ने कहा कि भगवा वस्त्रों का सम्मान बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। उनका कहना है कि धार्मिक प्रतीकों का उपयोग राजनीतिक विरोध के लिए नहीं किया जाना चाहिए। यह संबंधित वक्ता का सार्वजनिक मत है।

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सावन में दूधेश्वरनाथ मंदिर की महिमा: कांवड़ यात्रा का महत्व, शिव कृपा और सनातन धर्म

सावन में कांवड़ यात्रा का महत्व, दूधेश्वरनाथ मंदिर का इतिहास, भगवान शिव की महिमा, गाजियाबाद मंदिर कॉरिडोर और संत समाज का संदेश। पढ़ें पूरी खबर

गाजियाबाद। सावन का पावन महीना भगवान शिव की आराधना का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती पृथ्वी लोक पर भक्तों को आशीर्वाद देने आते हैं। इसी कारण लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा कर पवित्र गंगाजल लाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से जल चढ़ाने वाले भक्तों की मनोकामनाएं भगवान शिव पूर्ण करते हैं और माता पार्वती परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष का पान भगवान शिव ने किया था। विष की तपिश को शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर गंगाजल अर्पित किया था। तभी से सावन में जलाभिषेक की परंपरा विशेष महत्व रखती है।

गाजियाबाद स्थित दूधेश्वरनाथ मठ को अत्यंत प्राचीन और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार रावण के पिता महर्षि विश्रवा ने यहां भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी, जिसके बाद भगवान शिव पिंडी स्वरूप में यहां विराजमान हुए। यहां 28 संतों की समाधियां भी स्थित हैं। वर्तमान में मठ के महंत नारायण गिरि जी महाराज श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन कर रहे हैं।

हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिर परिसर का दौरा कर कॉरिडोर निर्माण कार्यों की समीक्षा की थी। प्रशासन के अनुसार मंदिर के विकास और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए विशेष कार्य किए जा रहे हैं। सावन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस, प्रशासन और नगर निगम की टीमें लगातार तैनात हैं।

राजनीतिक घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए संत समाज ने कहा कि भगवा वस्त्रों का सम्मान बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। उनका कहना है कि धार्मिक प्रतीकों का उपयोग राजनीतिक विरोध के लिए नहीं किया जाना चाहिए। यह संबंधित वक्ता का सार्वजनिक मत है।

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