भारत की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। प्रधानमंत्री Narendra Modi के हालिया विदेश दौरे और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) को लेकर विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं।
विपक्ष का आरोप है कि भारत को वैश्विक व्यापारिक परिस्थितियों के बदलते माहौल के अनुसार अपने आर्थिक समझौतों की समीक्षा करनी चाहिए। कुछ विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री को सार्वजनिक रूप से चुनौती देते हुए कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय समझौते देश के आर्थिक हितों के अनुरूप हैं या नहीं।
इसी बीच प्रधानमंत्री की इज़राइल यात्रा को लेकर भी राजनीतिक टिप्पणियां सामने आई हैं। विपक्ष का कहना है कि विदेश यात्राओं के दौरान होने वाले समझौतों और रणनीतिक साझेदारियों की जानकारी देश के सामने पारदर्शी तरीके से रखी जानी चाहिए।
हालांकि सरकार की ओर से कहा जाता रहा है कि भारत की विदेश नीति राष्ट्रीय हितों और रणनीतिक संतुलन को ध्यान में रखकर तय की जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत, अमेरिका और इज़राइल के साथ संबंध रक्षा, तकनीक और व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से जुड़े मुद्दे अब घरेलू राजनीति का भी बड़ा हिस्सा बनते जा रहे हैं, जिससे आने वाले समय में संसद और सार्वजनिक मंचों पर इस विषय पर बहस और तेज हो सकती है।



