नई दिल्ली: देश में बुजुर्ग नागरिकों की स्थिति को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती महंगाई, सीमित पेंशन और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण वरिष्ठ नागरिकों को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कई बुजुर्ग नागरिक अपनी मासिक पेंशन पर निर्भर हैं, लेकिन महंगाई दर में लगातार वृद्धि से उनकी क्रय शक्ति कम होती जा रही है। दवाइयों, इलाज और रोजमर्रा के खर्चों में बढ़ोतरी ने उनकी आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ाया है।
हालांकि सरकार द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ग्रामीण और छोटे शहरों में बुजुर्गों तक लाभ समय पर नहीं पहुंच पा रहा।
स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करें तो सरकारी अस्पतालों में लंबी कतारें और निजी अस्पतालों की ऊंची फीस भी चिंता का विषय है। डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के बीच कई बुजुर्ग तकनीकी चुनौतियों के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में असमर्थ हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए पेंशन में सुधार, स्वास्थ्य बीमा कवरेज का विस्तार और डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों की आवश्यकता है।
बुजुर्ग समाज का अनुभव और मार्गदर्शन किसी भी राष्ट्र की धरोहर होता है। ऐसे में उनकी सुरक्षा, सम्मान और सुविधाओं को प्राथमिकता देना समय की मांग बन गई है।



