हाल ही में उत्तर प्रदेश में आयोजित गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विपक्ष ने इस आयोजन में भीड़ प्रबंधन और व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। बयान में कहा गया कि “आयी हुई और लायी हुई भीड़ का अंतर साफ दिख रहा है,” जो इस कार्यक्रम की वास्तविकता को उजागर करता है।
बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बसों को लगाया गया, लेकिन उनमें अपेक्षित भीड़ नहीं दिखी। इससे यह संकेत मिलता है कि लोगों की स्वाभाविक भागीदारी कम रही। वहीं, बसों के ड्राइवरों और कंडक्टरों के लिए खाने, पानी और ठहरने की पर्याप्त व्यवस्था न होने की भी शिकायत सामने आई है।
इससे पहले बनारस में एक महिला के सड़क पर बेहोश होने की घटना ने भी प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े किए थे। इन घटनाओं को जोड़ते हुए विपक्ष ने भारतीय जनता पार्टी सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया है।
गर्मियों की छुट्टियों के दौरान जब आम जनता के लिए बसों की मांग बढ़ी रहती है, ऐसे में सरकारी कार्यक्रम के लिए बसों को कई दिनों तक रोकना लोगों को असुविधा में डाल सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं जनता के मूड को प्रभावित कर सकती हैं और आने वाले चुनावों में इसका असर देखने को मिल सकता है।



