नई दिल्ली। देश में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग समय-समय पर उठती रही है। इसी क्रम में कुछ मुस्लिम समाज के लोगों द्वारा भी यह राय सामने आई है कि यदि गाय भारतीय संस्कृति, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है तो सरकार को इसे राष्ट्रीय पशु घोषित करने पर विचार करना चाहिए।
वर्तमान में भारत का राष्ट्रीय पशु बाघ (टाइगर) है, जिसे वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के महत्व को देखते हुए यह दर्जा दिया गया था। वहीं गाय को हिंदू समाज में विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक सम्मान प्राप्त है तथा देश के कई राज्यों में गौ-हत्या पर प्रतिबंध या नियंत्रण संबंधी कानून भी लागू हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी जीव को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का निर्णय केवल धार्मिक भावनाओं के आधार पर नहीं बल्कि पर्यावरणीय, जैव विविधता, संरक्षण और राष्ट्रीय महत्व जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखकर लिया जाता है।
हालांकि, गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने की मांग करने वाले लोगों का तर्क है कि यह पशु भारतीय कृषि, दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा है। वहीं कुछ लोग मानते हैं कि इस विषय पर व्यापक राष्ट्रीय सहमति और विशेषज्ञों की राय आवश्यक है।
फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने संबंधी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन इस मुद्दे पर समाज के विभिन्न वर्गों में चर्चा लगातार जारी है।



