नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के बीच शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदर्शनकारियों और आयोजकों ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया गया कि सुबह करीब 7 बजे पुलिस ने सुरक्षा घेरा बनाकर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को धरना स्थल से हटाया।
वक्ताओं के अनुसार, इस कार्रवाई के दौरान कई स्वयंसेवकों के साथ कथित धक्का-मुक्की हुई और कुछ लोगों को चोटें भी आईं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बल प्रयोग किया और बाद में परिवार, डॉक्टरों तथा वकीलों से मुलाकात की अनुमति भी नहीं दी गई।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी दावा किया गया कि दिल्ली पुलिस द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश का हवाला दिया गया, जबकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि न्यायालय के आदेश का उद्देश्य केवल स्वास्थ्य संबंधी स्थिति गंभीर होने पर चिकित्सकीय देखभाल सुनिश्चित करना था। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
इस बीच दिल्ली पुलिस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया और विस्तृत जानकारी का इंतजार है। मामले को लेकर अलग-अलग पक्षों के बयान सामने आ रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने घोषणा की कि वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे और 20 जुलाई को प्रस्तावित शांतिपूर्ण मार्च अपने तय कार्यक्रम के अनुसार आयोजित करने का प्रयास करेंगे।
सोनम वांगचुक लंबे समय से पर्यावरण संरक्षण, हिमालय और लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। जंतर-मंतर की इस घटना के बाद पूरे मामले पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।
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