Wednesday, April 15, 2026

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हिमंत बिस्वा सरमा मीडिया के सवालों से बचते दिखे, पत्रकारों पर लगाए आरोप

“उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे” जैसी स्थिति, बयान पर बढ़ी राजनीतिक बहस

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल ही में मीडिया से बातचीत के दौरान वे कुछ सवालों से बचते नजर आए, जिसके बाद उन्होंने पत्रकारों पर ही आरोप लगा दिए।

घटना के दौरान पत्रकारों ने उनसे विभिन्न मुद्दों पर सवाल पूछे, लेकिन सरमा ने सीधे जवाब देने के बजाय मीडिया की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने संकेत दिया कि कुछ पत्रकार तथ्यों को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं कर रहे हैं।

इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विपक्षी दलों ने इसे “उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे” की स्थिति बताते हुए सरकार की आलोचना की है। उनका कहना है कि जब जवाब देने की बारी आती है, तो जिम्मेदारी से बचने के लिए मीडिया पर आरोप लगाए जाते हैं।

सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन कर रहे हैं, तो वहीं कई लोग इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बता रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विवाद लोकतंत्र में मीडिया और सरकार के बीच संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं।

फिलहाल यह मामला राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है और आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

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हिमंत बिस्वा सरमा मीडिया के सवालों से बचते दिखे, पत्रकारों पर लगाए आरोप

“उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे” जैसी स्थिति, बयान पर बढ़ी राजनीतिक बहस

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल ही में मीडिया से बातचीत के दौरान वे कुछ सवालों से बचते नजर आए, जिसके बाद उन्होंने पत्रकारों पर ही आरोप लगा दिए।

घटना के दौरान पत्रकारों ने उनसे विभिन्न मुद्दों पर सवाल पूछे, लेकिन सरमा ने सीधे जवाब देने के बजाय मीडिया की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने संकेत दिया कि कुछ पत्रकार तथ्यों को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं कर रहे हैं।

इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विपक्षी दलों ने इसे “उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे” की स्थिति बताते हुए सरकार की आलोचना की है। उनका कहना है कि जब जवाब देने की बारी आती है, तो जिम्मेदारी से बचने के लिए मीडिया पर आरोप लगाए जाते हैं।

सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन कर रहे हैं, तो वहीं कई लोग इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बता रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विवाद लोकतंत्र में मीडिया और सरकार के बीच संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं।

फिलहाल यह मामला राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है और आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

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