नगर निगम गाजियाबाद के अंतर्गत कार्यरत ठेका कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने ठेकेदार कंपनियों, सुपरवाइजरों और अधिकारियों पर शोषण तथा भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। “मजदूर एकता जिंदाबाद” के नारों के बीच बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी, चालक और सहायक एकत्र हुए और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि नगर निगम के स्थायी कर्मचारियों और ठेका कर्मचारियों के बीच वेतन में भारी असमानता है। उनका आरोप है कि सरकारी चालक जहां लगभग ₹30,000 मासिक वेतन प्राप्त करते हैं, वहीं ठेका चालक और सहायक समान कार्य करने के बावजूद बेहद कम वेतन पर काम करने को मजबूर हैं। कर्मचारियों ने मांग की कि उन्हें भी न्यूनतम ₹30,000 मासिक वेतन दिया जाए।
मजदूरों ने कहा कि वे प्रतिदिन सुबह से देर शाम तक शहर की सफाई और कूड़ा उठाने का कार्य करते हैं, ताकि आम जनता को स्वच्छ वातावरण मिल सके। इसके बावजूद उन्हें उचित वेतन, सुविधाएं और सम्मान नहीं मिल रहा है। प्रदर्शन के दौरान कई कर्मचारियों ने भावुक होकर कहा कि उन्हें दो वक्त की रोटी तक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि नौकरी के दौरान उनसे सिक्योरिटी अमाउंट जमा कराया जाता है, लेकिन नौकरी छोड़ने या इस्तीफा देने के बाद वह राशि वापस नहीं की जाती। साथ ही विभिन्न कार्यों के नाम पर पैसों की मांग किए जाने के भी आरोप लगाए गए।
प्रदर्शनकारी मजदूरों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि ठेका कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा की जाए और शोषण पर तत्काल रोक लगाई जाए। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा।



