गाजियाबाद। भारतीय किसान यूनियन सुनील ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संपत्ति पंजीकरण व्यवस्था को निजी कंपनी को सौंपने के प्रस्ताव के खिलाफ चल रही अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों की हड़ताल को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है।
संगठन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रदेश सरकार के इस निर्णय से हजारों अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों के रोजगार एवं आय के साधनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। किसान यूनियन का मानना है कि इस फैसले से न केवल संबंधित पेशे से जुड़े लोगों का भविष्य प्रभावित होगा बल्कि उनके परिवारों के सामने भी आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।
जारी बयान में कहा गया है कि अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों द्वारा प्रदेशभर में किए जा रहे विरोध प्रदर्शन और हड़ताल को भारतीय किसान यूनियन सुनील का पूर्ण समर्थन प्राप्त है। संगठन ने सरकार से मांग की है कि वह इस फैसले पर पुनर्विचार करे और संबंधित पक्षों से संवाद स्थापित कर समाधान निकाले।
भारतीय किसान यूनियन सुनील के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अपना निर्णय वापस नहीं लिया तो संगठन के सभी पदाधिकारी और कार्यकर्ता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेंगे तथा धरना-प्रदर्शन स्थलों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
संगठन का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी निर्णय से प्रभावित वर्गों की राय लेना आवश्यक है। ऐसे में सरकार को अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
इस घोषणा के बाद अधिवक्ता और दस्तावेज लेखक संगठनों को एक बड़ा समर्थन मिला है, जिससे आंदोलन को और मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है।



