नई दिल्ली। आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिषाचार्य डॉ. पवन सिन्हा के व्यक्तित्व और उनके मार्गदर्शन को लेकर उनकी शिष्या सुरभि ने एक विशेष बातचीत में कई महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि डॉ. पवन सिन्हा केवल एक ज्योतिषाचार्य ही नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक गुरु, शिक्षक और अंतरराष्ट्रीय विषयों के जानकार भी हैं।
सुरभि ने बताया कि गुरुजी का मानना है कि ज्योतिष केवल विवाह, नौकरी या संतान तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक ज्ञान परंपरा है जो व्यक्ति के जीवन, व्यक्तित्व और आत्मिक विकास को समझने में सहायक हो सकती है। उनके अनुसार, गुरुजी योग और ज्योतिष को जीवन को बेहतर बनाने के महत्वपूर्ण साधन मानते हैं।
उन्होंने अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि बताते हुए कहा कि उन्होंने बी.टेक., बी.एड., मनोविज्ञान में मास्टर्स किया है और वर्तमान में शिक्षा विषय में पीएचडी कर रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उनके व्यक्तित्व का वास्तविक निर्माण ‘पावन चिंतन धारा आश्रम’ में हुआ, जहां वे लगभग 15 वर्षों से प्रशिक्षण ले रही हैं।
सुरभि के अनुसार, आश्रम केवल धार्मिक स्थल नहीं बल्कि व्यक्तित्व निर्माण का प्रशिक्षण केंद्र है, जहां ध्यान, यज्ञ, अध्ययन और राष्ट्र सेवा की भावना विकसित की जाती है। उन्होंने कहा कि गुरुजी युवाओं को राष्ट्र निर्माण, समाज सेवा और अपने जीवन के उद्देश्य को समझने के लिए प्रेरित करते हैं।
दीक्षा के महत्व पर उन्होंने कहा कि गुरु के मार्गदर्शन से व्यक्ति अपने जीवन के उद्देश्य को पहचानता है और समाज व राष्ट्र के लिए सकारात्मक योगदान देने की दिशा में आगे बढ़ता है।
(यह समाचार साक्षात्कार में व्यक्त विचारों पर आधारित है। इसमें व्यक्त दावे और मत संबंधित वक्ता के हैं।)



