Monday, August 3, 2026

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गाज़ियाबाद के पतला निवाड़ी मोदीनगर में पशु अस्पताल की बदहाली उजागर | सुविधाओं की भारी कमी 6 नवंबर 2025

इलाज में लापरवाही और संसाधनों की कमी से ग्रामीण परेशान, जिम्मेदार विभागों पर उठे सवाल

गाज़ियाबाद जिले के मोदीनगर क्षेत्र स्थित पतला निवाड़ी गांव के पशु अस्पताल की दयनीय हालत ने ग्रामीणों की चिंता को बढ़ा दिया है। गांव के बुजुर्गों और पशुपालकों ने मीडिया के सामने अस्पताल की वास्तविक स्थिति उजागर की, जिसमें दवाइयों की भारी कमी, डॉक्टरों की अनियमित मौजूदगी और साफ-सफाई की लचर व्यवस्था जैसी गंभीर समस्याएं सामने आईं।

ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल में किसी भी तरह की आपातकालीन दवा उपलब्ध नहीं रहती। पशु बीमार पड़ने पर किसानों को अस्पताल के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं, लेकिन कई बार वहां डॉक्टर मिलने की उम्मीद भी बहुत कम रहती है। डॉक्टरों की गैरहाजिरी के चलते कई पशुपालक निजी क्लीनिकों में महंगा इलाज करवाने को मजबूर हो जाते हैं। इससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है और समय पर इलाज न मिलने से पशुओं की जान तक खतरे में पड़ जाती है।

स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि अस्पताल की इमारत खस्ताहाल है और साफ-सफाई की व्यवस्था बेहद खराब है। बरसात के दिनों में अस्पताल के अंदर पानी भर जाता है, जिससे संक्रमण फैलने का डर रहता है। गांव में बड़ी संख्या में पशुधन होने के बावजूद यहां की सुविधाएं न्यूनतम स्तर पर हैं, जो गंभीर लापरवाही को दर्शाती हैं।

ग्रामीणों ने जिम्मेदार विभागों से तत्काल कार्रवाई की मांग की है ताकि पशुपालकों को राहत मिल सके और पशुओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सके। फिलहाल विभाग की ओर से इस स्थिति पर कोई ठोस कदम न उठाए जाने से स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो वे बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने के लिए भी मजबूर होंगे।

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गाज़ियाबाद के पतला निवाड़ी मोदीनगर में पशु अस्पताल की बदहाली उजागर | सुविधाओं की भारी कमी 6 नवंबर 2025

इलाज में लापरवाही और संसाधनों की कमी से ग्रामीण परेशान, जिम्मेदार विभागों पर उठे सवाल

गाज़ियाबाद जिले के मोदीनगर क्षेत्र स्थित पतला निवाड़ी गांव के पशु अस्पताल की दयनीय हालत ने ग्रामीणों की चिंता को बढ़ा दिया है। गांव के बुजुर्गों और पशुपालकों ने मीडिया के सामने अस्पताल की वास्तविक स्थिति उजागर की, जिसमें दवाइयों की भारी कमी, डॉक्टरों की अनियमित मौजूदगी और साफ-सफाई की लचर व्यवस्था जैसी गंभीर समस्याएं सामने आईं।

ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल में किसी भी तरह की आपातकालीन दवा उपलब्ध नहीं रहती। पशु बीमार पड़ने पर किसानों को अस्पताल के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं, लेकिन कई बार वहां डॉक्टर मिलने की उम्मीद भी बहुत कम रहती है। डॉक्टरों की गैरहाजिरी के चलते कई पशुपालक निजी क्लीनिकों में महंगा इलाज करवाने को मजबूर हो जाते हैं। इससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है और समय पर इलाज न मिलने से पशुओं की जान तक खतरे में पड़ जाती है।

स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि अस्पताल की इमारत खस्ताहाल है और साफ-सफाई की व्यवस्था बेहद खराब है। बरसात के दिनों में अस्पताल के अंदर पानी भर जाता है, जिससे संक्रमण फैलने का डर रहता है। गांव में बड़ी संख्या में पशुधन होने के बावजूद यहां की सुविधाएं न्यूनतम स्तर पर हैं, जो गंभीर लापरवाही को दर्शाती हैं।

ग्रामीणों ने जिम्मेदार विभागों से तत्काल कार्रवाई की मांग की है ताकि पशुपालकों को राहत मिल सके और पशुओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सके। फिलहाल विभाग की ओर से इस स्थिति पर कोई ठोस कदम न उठाए जाने से स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो वे बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने के लिए भी मजबूर होंगे।

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