ग्रेटर नोएडा वेस्ट के बिसरख गांव में स्थित प्राचीन शिव मंदिर अपनी रहस्यमयी मान्यताओं और ऐतिहासिक कथा के कारण पूरे देश में अनोखी पहचान रखता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह स्थान लंकापति रावण के जन्मस्थान से जुड़ा माना जाता है। यही वह भूमि बताई जाती है जहाँ रावण के पिता ऋषि विश्वश्रवा ने तपस्या कर भगवान शिव की आराधना की थी और अष्टकोणीय शिवलिंग की स्थापना की थी।
ग्रेटर नोएडा, जो आज आधुनिक विकास और हाईटेक इमारतों के लिए जाना जाता है, अपने भीतर इस प्राचीन आस्था स्थल की कहानी भी समेटे हुए है। ग्रामीणों के अनुसार बिसरख गांव का नाम भी ‘विश्वश्रवा’ शब्द से अपभ्रंश होकर पड़ा। कहा जाता है कि इसी स्थान पर रावण ने बाल्यकाल से ही कठोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे अद्वितीय शक्ति, बुद्धि और पराक्रम का वरदान दिया।

मंदिर के गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग लाल पत्थर से निर्मित अष्टकोणीय रूप में स्थित है। इसकी गहराई और वास्तविक आकार आज तक रहस्य बना हुआ है। मान्यता है कि जब-जब शिवलिंग को हटाने या दबाने का प्रयास किया गया, वह अपने मूल आकार से भी बड़ा होकर प्रकट हुआ। इसी कारण श्रद्धालु इसे “चमत्कारी शिवलिंग” भी कहते हैं।
इस मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा दशहरे के समय देखने को मिलती है। जहां पूरे देश में रावण के पुतले का दहन किया जाता है, वहीं बिसरख गांव में रावण को खलनायक नहीं बल्कि पूर्वज माना जाता है। यहां दशहरे पर राम और रावण दोनों की विधिवत पूजा होती है और रावण दहन नहीं किया जाता।
स्थानीय लोगों का विश्वास है कि इस मंदिर में सच्चे मन से पूजा करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कई प्रसिद्ध नेता और संत भी यहां दर्शन के लिए आ चुके हैं। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि रामायण काल की उन कथाओं का जीवंत प्रमाण भी माना जाता है, जहां शिव भक्ति और रावण का अद्भुत संबंध सामने आता है।



