पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच भारत ने एक बार फिर अपनी मजबूत कूटनीति और रणनीतिक क्षमता का परिचय दिया है। संकट की इस घड़ी में भी भारत ने न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भी अपनी तैयारियों को साबित किया है।
सरकार के प्रयासों से अब तक करीब 3.75 लाख भारतीयों की सुरक्षित घर वापसी संभव हो पाई है, जो वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती ताकत और प्रभाव को दर्शाता है। विदेश मंत्रालय और अन्य एजेंसियों के समन्वय से यह अभियान सफलतापूर्वक संचालित किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने संकट के समय के लिए कच्चे तेल के भंडारण पर विशेष ध्यान दिया है। वर्तमान में भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार है, जिसे बढ़ाकर 65 लाख मीट्रिक टन से अधिक करने की योजना पर काम जारी है। इसके अलावा, सरकारी तेल कंपनियों के पास भी अलग से भंडार मौजूद हैं।
यह रणनीति भारत को वैश्विक अस्थिरता के बीच भी ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने में सक्षम बनाती है। जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए भारतीय नौसेना और कूटनीतिक प्रयास लगातार सक्रिय हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह नीति आने वाले समय में उसे वैश्विक मंच पर और अधिक मजबूत बनाएगी।
संकट चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, भारत ने यह साबित कर दिया है कि अडिग नेतृत्व और मजबूत रणनीति ही समाधान है।



