Saturday, April 18, 2026

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वैर विधानसभा: बजट में घोषणाओं की बाढ़, लेकिन वैर क्यों रह गया सूखा?

राजस्थान बजट में भरतपुर जिले के कई क्षेत्रों को बड़ी परियोजनाएँ मिलीं, लेकिन वैर विधानसभा के लिए कोई स्पष्ट योजना नहीं दिखती। नीति विश्लेषक तनिष्क नगायच ने विकास और प्राथमिकता पर सवाल उठाए।

राजस्थान सरकार द्वारा हाल ही में प्रस्तुत बजट को व्यापक और विकासोन्मुख बताया गया है। बजट दस्तावेज़ों में राज्य के कई जिलों और विधानसभा क्षेत्रों के लिए सड़क, चिकित्सा, शिक्षा और औद्योगिक परियोजनाओं की घोषणाएँ दिखाई देती हैं। भरतपुर जिले के कई क्षेत्रों—जैसे Deeg, Bayana और Bharatpur—के लिए विभिन्न विकास योजनाओं का उल्लेख स्पष्ट रूप से सामने आता है।

लेकिन इसी बीच एक सवाल लगातार उठ रहा है—Weir विधानसभा क्षेत्र के हिस्से में आखिर क्या आया?

लेखक और नीति विश्लेषक Tanishk Nagayach का कहना है कि यदि बजट दस्तावेजों को ध्यान से देखा जाए तो वैर विधानसभा के लिए किसी बड़ी और स्पष्ट परियोजना का उल्लेख दिखाई नहीं देता। उनके अनुसार पिछले तीन बजट सत्रों में घोषणाओं की सूची लंबी रही है, लेकिन वैर के संदर्भ में कोई ठोस और प्रत्यक्ष योजना सामने नहीं आई।

हालाँकि एक सड़क परियोजना का उल्लेख मिलता है जिसकी लागत लगभग 75 करोड़ रुपये बताई जाती है, लेकिन यह भी सीधे वैर विधानसभा क्षेत्र के भीतर नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्र से संबंधित बताई जाती है।

तनिष्क नगायच का कहना है कि जब आसपास की विधानसभाओं में कई परियोजनाएँ दिखाई देती हैं और वैर अपेक्षाकृत खाली नजर आता है, तो यह केवल तुलना का विषय नहीं रह जाता बल्कि यह प्रतिनिधित्व और प्राथमिकता का प्रश्न बन जाता है।

उनका कहना है कि वैर विधानसभा क्षेत्र आज भी कई बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। क्षेत्र में समुचित बस स्टैंड जैसी मूलभूत सुविधा नहीं है, जबकि आवागमन व्यवस्था भी अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती है। कृषि प्रधान क्षेत्र होने के बावजूद यहाँ कृषि महाविद्यालय की स्थापना नहीं हो सकी है और युवाओं के लिए औद्योगिक क्षेत्र या रोजगार केंद्र की स्पष्ट व्यवस्था भी नहीं दिखाई देती।

नगायच के अनुसार वैर और आसपास का इलाका पशुपालन के लिए भी जाना जाता है, लेकिन यहाँ पशु चिकित्सा महाविद्यालय जैसी संस्थागत व्यवस्था अभी तक स्थापित नहीं हो पाई है। इसके अलावा फूड प्रोसेसिंग और ऐतिहासिक धरोहरों—जैसे नहर, महल और किलों—के विकास में भी पर्याप्त पहल दिखाई नहीं देती।

तनिष्क नगायच का कहना है कि विकास का आकलन केवल राजनीतिक दावों से नहीं बल्कि परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण जैसे ठोस संकेतकों से किया जाना चाहिए।

उनके अनुसार वैर विधानसभा की कहानी किसी विरोध की नहीं बल्कि एक प्रश्न की कहानी है—यदि भरतपुर जिले के कई क्षेत्रों को बजट में स्थान मिला है, तो वैर भी उसी जिले का हिस्सा होते हुए उस सूची में स्पष्ट रूप से क्यों नहीं दिखाई देता? यह प्रश्न अभी भी उत्तर की प्रतीक्षा में है।

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वैर विधानसभा: बजट में घोषणाओं की बाढ़, लेकिन वैर क्यों रह गया सूखा?

राजस्थान बजट में भरतपुर जिले के कई क्षेत्रों को बड़ी परियोजनाएँ मिलीं, लेकिन वैर विधानसभा के लिए कोई स्पष्ट योजना नहीं दिखती। नीति विश्लेषक तनिष्क नगायच ने विकास और प्राथमिकता पर सवाल उठाए।

राजस्थान सरकार द्वारा हाल ही में प्रस्तुत बजट को व्यापक और विकासोन्मुख बताया गया है। बजट दस्तावेज़ों में राज्य के कई जिलों और विधानसभा क्षेत्रों के लिए सड़क, चिकित्सा, शिक्षा और औद्योगिक परियोजनाओं की घोषणाएँ दिखाई देती हैं। भरतपुर जिले के कई क्षेत्रों—जैसे Deeg, Bayana और Bharatpur—के लिए विभिन्न विकास योजनाओं का उल्लेख स्पष्ट रूप से सामने आता है।

लेकिन इसी बीच एक सवाल लगातार उठ रहा है—Weir विधानसभा क्षेत्र के हिस्से में आखिर क्या आया?

लेखक और नीति विश्लेषक Tanishk Nagayach का कहना है कि यदि बजट दस्तावेजों को ध्यान से देखा जाए तो वैर विधानसभा के लिए किसी बड़ी और स्पष्ट परियोजना का उल्लेख दिखाई नहीं देता। उनके अनुसार पिछले तीन बजट सत्रों में घोषणाओं की सूची लंबी रही है, लेकिन वैर के संदर्भ में कोई ठोस और प्रत्यक्ष योजना सामने नहीं आई।

हालाँकि एक सड़क परियोजना का उल्लेख मिलता है जिसकी लागत लगभग 75 करोड़ रुपये बताई जाती है, लेकिन यह भी सीधे वैर विधानसभा क्षेत्र के भीतर नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्र से संबंधित बताई जाती है।

तनिष्क नगायच का कहना है कि जब आसपास की विधानसभाओं में कई परियोजनाएँ दिखाई देती हैं और वैर अपेक्षाकृत खाली नजर आता है, तो यह केवल तुलना का विषय नहीं रह जाता बल्कि यह प्रतिनिधित्व और प्राथमिकता का प्रश्न बन जाता है।

उनका कहना है कि वैर विधानसभा क्षेत्र आज भी कई बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। क्षेत्र में समुचित बस स्टैंड जैसी मूलभूत सुविधा नहीं है, जबकि आवागमन व्यवस्था भी अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती है। कृषि प्रधान क्षेत्र होने के बावजूद यहाँ कृषि महाविद्यालय की स्थापना नहीं हो सकी है और युवाओं के लिए औद्योगिक क्षेत्र या रोजगार केंद्र की स्पष्ट व्यवस्था भी नहीं दिखाई देती।

नगायच के अनुसार वैर और आसपास का इलाका पशुपालन के लिए भी जाना जाता है, लेकिन यहाँ पशु चिकित्सा महाविद्यालय जैसी संस्थागत व्यवस्था अभी तक स्थापित नहीं हो पाई है। इसके अलावा फूड प्रोसेसिंग और ऐतिहासिक धरोहरों—जैसे नहर, महल और किलों—के विकास में भी पर्याप्त पहल दिखाई नहीं देती।

तनिष्क नगायच का कहना है कि विकास का आकलन केवल राजनीतिक दावों से नहीं बल्कि परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण जैसे ठोस संकेतकों से किया जाना चाहिए।

उनके अनुसार वैर विधानसभा की कहानी किसी विरोध की नहीं बल्कि एक प्रश्न की कहानी है—यदि भरतपुर जिले के कई क्षेत्रों को बजट में स्थान मिला है, तो वैर भी उसी जिले का हिस्सा होते हुए उस सूची में स्पष्ट रूप से क्यों नहीं दिखाई देता? यह प्रश्न अभी भी उत्तर की प्रतीक्षा में है।

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