Wednesday, April 22, 2026

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शहीद के बेटे गौरव फौजदार पेंघोर को अब तक नहीं मिली अनुकम्पा नौकरी — न्याय की लड़ाई में उठी आवाज़

सीआरपीएफ की 114वीं बटालियन में ड्यूटी के दौरान हुई थी शहीद की मौत, परिवार आज भी न्याय की प्रतीक्षा में

भरतपुर। (राजस्थान धरा लाइव न्यूज़ / यशपाल सोलंकी)
राजस्थान के भरतपुर जिले में एक शहीद के बेटे को आज भी न्याय की प्रतीक्षा है। गौरव फौजदार पेंघोर, जिनके पिता सीआरपीएफ (CRPF) की 114वीं बटालियन में ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए थे, उन्हें अब तक अनुकम्पा नियुक्ति नहीं मिल पाई है। यह घटना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि शहीद परिवारों के प्रति हमारा तंत्र कितना संवेदनहीन होता जा रहा है।

गौरव फौजदार पेंघोर पिछले कई वर्षों से अपने पिता के बलिदान के बदले अनुकम्पा नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। लेकिन तमाम आवेदन, पत्राचार और गुहारों के बाद भी अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

भरतपुर निवासी पवन ठाकुर ने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाते हुए कहा कि “इस जिले में, इस संभाग में और इस प्रदेश में शहीदों के परिवारों की आवाज सुनने वाला कोई नहीं है। बड़े-बड़े नेता और संगठन शहीदों के नाम पर राजनीति करते हैं, लेकिन जब किसी शहीद परिवार को वास्तव में मदद की ज़रूरत होती है, तो सब मौन हो जाते हैं।”

पवन ठाकुर ने आगे कहा कि “आज अगर हम गौरव फौजदार पेंघोर के साथ खड़े नहीं हुए, तो कल कोई हमारे साथ भी खड़ा नहीं होगा। हमें एकजुट होकर इस बेटे को उसका हक दिलाना होगा। राजस्थान सरकार और केंद्र सरकार से निवेदन है कि वे गौरव फौजदार पेंघोर को शीघ्र अनुकम्पा नौकरी दें।”

उन्होंने यह भी कहा कि शहीदों के परिवारों की मदद के नाम पर कई फर्जी संगठन और दलाल सक्रिय हैं, लेकिन अब वक्त आ गया है कि असली शहीद परिवारों की आवाज़ को उठाया जाए।

गौरव फौजदार पेंघोर इस समय अपने हक के लिए संघर्षरत हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार उनकी बात सुनेगी तथा उनके पिता के बलिदान का सम्मान करते हुए उन्हें अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान करेगी।

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शहीद के बेटे गौरव फौजदार पेंघोर को अब तक नहीं मिली अनुकम्पा नौकरी — न्याय की लड़ाई में उठी आवाज़

सीआरपीएफ की 114वीं बटालियन में ड्यूटी के दौरान हुई थी शहीद की मौत, परिवार आज भी न्याय की प्रतीक्षा में

भरतपुर। (राजस्थान धरा लाइव न्यूज़ / यशपाल सोलंकी)
राजस्थान के भरतपुर जिले में एक शहीद के बेटे को आज भी न्याय की प्रतीक्षा है। गौरव फौजदार पेंघोर, जिनके पिता सीआरपीएफ (CRPF) की 114वीं बटालियन में ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए थे, उन्हें अब तक अनुकम्पा नियुक्ति नहीं मिल पाई है। यह घटना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि शहीद परिवारों के प्रति हमारा तंत्र कितना संवेदनहीन होता जा रहा है।

गौरव फौजदार पेंघोर पिछले कई वर्षों से अपने पिता के बलिदान के बदले अनुकम्पा नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। लेकिन तमाम आवेदन, पत्राचार और गुहारों के बाद भी अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

भरतपुर निवासी पवन ठाकुर ने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाते हुए कहा कि “इस जिले में, इस संभाग में और इस प्रदेश में शहीदों के परिवारों की आवाज सुनने वाला कोई नहीं है। बड़े-बड़े नेता और संगठन शहीदों के नाम पर राजनीति करते हैं, लेकिन जब किसी शहीद परिवार को वास्तव में मदद की ज़रूरत होती है, तो सब मौन हो जाते हैं।”

पवन ठाकुर ने आगे कहा कि “आज अगर हम गौरव फौजदार पेंघोर के साथ खड़े नहीं हुए, तो कल कोई हमारे साथ भी खड़ा नहीं होगा। हमें एकजुट होकर इस बेटे को उसका हक दिलाना होगा। राजस्थान सरकार और केंद्र सरकार से निवेदन है कि वे गौरव फौजदार पेंघोर को शीघ्र अनुकम्पा नौकरी दें।”

उन्होंने यह भी कहा कि शहीदों के परिवारों की मदद के नाम पर कई फर्जी संगठन और दलाल सक्रिय हैं, लेकिन अब वक्त आ गया है कि असली शहीद परिवारों की आवाज़ को उठाया जाए।

गौरव फौजदार पेंघोर इस समय अपने हक के लिए संघर्षरत हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार उनकी बात सुनेगी तथा उनके पिता के बलिदान का सम्मान करते हुए उन्हें अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान करेगी।

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