उत्तर प्रदेश: प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर किए जा रहे दावों के बीच एक गंभीर और भयावह मामला सामने आया है। विद्या सागर द्विवेदी बीते एक माह से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हैं। परिजनों का आरोप है कि उनके बैंक खातों से लाखों रुपये की निकासी हो चुकी है, इसके बावजूद नामजद आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
परिजनों के अनुसार, उन्होंने एक माह पहले ही थाने में नामजद तहरीर देकर अपहरण और आर्थिक धोखाधड़ी की आशंका जताई थी तथा सघन जांच की मांग की थी। लेकिन पुलिस ने केवल गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर औपचारिक कार्रवाई शुरू की, जिससे परिवार में गहरा आक्रोश है।
सबसे बड़ा और डराने वाला सवाल यह है कि विद्या सागर द्विवेदी इस समय जीवित भी हैं या नहीं। बैंक खातों से धन निकासी ने मामले को और भी संदिग्ध बना दिया है। इस अनिश्चितता ने पूरे परिवार को मानसिक दहशत में डाल दिया है। उनकी पत्नी, बेटा और बेटी लगातार भय और पीड़ा में जीवन गुजारने को मजबूर हैं।
योगी आदित्यनाथ सरकार में अपराध और अपराधियों पर सख्ती के दावे किए जाते हैं, लेकिन इस संवेदनशील मामले में पुलिस-प्रशासन की धीमी कार्रवाई कई सवाल खड़े कर रही है। क्या यह मामला लापरवाही का शिकार हो रहा है? क्या आर्थिक लेन-देन से जुड़ा कोई बड़ा अपराध दबाया जा रहा है?
पीड़ित परिवार शासन-प्रशासन से मांग कर रहा है कि मामले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और त्वरित जांच कराई जाए। साथ ही नामजद आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी हो और विद्या सागर द्विवेदी की स्थिति को लेकर सच्चाई जल्द से जल्द सामने लाई जाए।



