गाज़ियाबाद
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा 15 दिसंबर 2025 को पटना में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मुस्लिम महिला डॉक्टर नुसरत परवीन का कथित रूप से हिजाब हटाने की घटना को लेकर देशभर में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिल रहा है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने इस घटना को बेहद शर्मनाक बताते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मानसिक स्थिति पर सवाल खड़े किए हैं। वहीं कांग्रेस पार्टी ने इसे महिला सम्मान और धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताते हुए मुख्यमंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा देने की मांग की है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से इस तरह के व्यवहार की अपेक्षा नहीं की जा सकती।
AIMIM के वरिष्ठ नेता वारिस पठान ने इस कृत्य को अमानवीय, शर्मनाक और पूरी तरह अस्वीकार्य करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह घटना लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की आत्मा के खिलाफ है। इसी क्रम में पीडीपी प्रमुख और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी नीतीश कुमार को पद छोड़ने की सलाह देते हुए इस घटना की कड़ी निंदा की है।
मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तूल पकड़ लिया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे इस्लामोफोबिया से जोड़कर देखा है, जिससे भारत की आंतरिक राजनीति से जुड़ा यह मुद्दा वैश्विक मंच पर चर्चा का विषय बन गया है।
घटना से गहराई से आहत मुस्लिम महिला डॉक्टर नुसरत परवीन ने बिहार छोड़ दिया है। जाते-जाते उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि इस घटना के बाद उन्हें मानसिक प्रताड़ना, असुरक्षा और सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ा।
इसी बीच इस मुद्दे को लेकर AIMIM पार्टी द्वारा गाज़ियाबाद में भी जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। AIMIM महानगर गाज़ियाबाद अध्यक्ष पं. मनमोहन झा “गामा” के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए इस घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं की गई, तो अल्पसंख्यकों में भय का माहौल और गहरा होगा।



