मौर्य परिवार में खुशियों का माहौल उस समय चरम पर पहुंच गया जब राम अचल मौर्य और पूनम मौर्या की पुत्री लक्ष्मी की शादी से पहले आयोजित हल्दी और मेहंदी समारोह बड़े धूमधाम और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सम्पन्न हुआ। पूरे परिवार की एकजुटता और उत्साह ने इस महत्वपूर्ण अवसर को यादगार बना दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक विधि से हुई, जहां परिवार की महिलाओं ने ढोलक की थाप पर मंगल गीत गाते हुए रश्मि के हाथों और चेहरे पर हल्दी लगाई। हल्दी की रस्म को शुभ और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, और मौर्य परिवार ने इसी भावना के साथ इस रस्म को अत्यंत प्यार और सम्मान से निभाय लक्ष्मी पिता राम अचल मौर्य और माता पूनम मौर्या ने मेहमानों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उनकी बेटी को विवाह की नई शुरुआत की ओर बढ़ते देखकर परिवार भावुक भी हुआ और प्रसन्न भी। रश्मि के भाई—विकास मौर्य और विशाल मौर्य—ने पूरी रस्म में अपनी बहन का उत्साह बढ़ाते हुए परंपरा, भाईचारे और जिम्मेदारी का अद्भुत मेल प्रस्तुत किया।
समारोह में वधू के मामा शुशील मौर्या, जिन्हें परिवार में अत्यंत सम्मान प्राप्त है, ने पूरा आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं चाचा राम नवल मौर्य की उपस्थिति ने परिवारिक एकता को और मजबूत किया। पूरा मौर्य परिवार हर्षोल्लास से भरा नजर आया और हर सदस्य ने अपने-अपने ढंग से इस दिवस को खास बनाया।
मेहंदी समारोह में पेशेवर कलाकारों ने लक्ष्मी हाथों पर सुंदर और पारंपरिक डिज़ाइन उकेरे, जिसमें दूल्हा-दुल्हन के नाम और विवाह के प्रतीकात्मक चिन्ह विशेष आकर्षण रहे। महिलाओं और युवतियों ने भी मेहंदी लगवाकर समारोह में रंग भरे।
रात्रि में परिवार द्वारा सभी मेहमानों के लिए स्वादिष्ट भोजन की व्यवस्था की गई, जिसकी सभी ने प्रशंसा की।
मौर्य परिवार के इस आयोजन ने परंपरा, संस्कृति और परिवारिक एकता का सुंदर संदेश समाज तक पहुंचाया।
अब पूरा परिवार लक्ष्मी के विवाह समारोह की तैयारियों में और भी उत्साह के साथ जुट गया है।



