Friday, June 12, 2026

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UGC Role Back आंदोलन: 7 मार्च को प्रशासन ने कई संतों और नेताओं को किया नजरबंद

रामलीला मैदान और जंतर-मंतर पर प्रस्तावित शांतिपूर्ण धरना रद्द, मीडिया को मिलने की अनुमति नहीं

8 मार्च: UGC Role Back आंदोलन को लेकर बड़ा एक्शन, कई संत और नेता नजरबंद

नई दिल्ली। UGC Role Back आंदोलन को लेकर देशभर में बढ़ती हलचल के बीच प्रशासन ने 7 मार्च को बड़ा कदम उठाते हुए कई प्रमुख संतों और आंदोलन से जुड़े नेताओं को नजरबंद कर दिया। सूत्रों के अनुसार प्रशासन ने आंदोलन के संभावित विस्तार को देखते हुए यह कार्रवाई की।

नजरबंद किए गए प्रमुख व्यक्तियों में डॉ. राज सखावत महाराज, आनंद स्वरूप महाराज, आनंदगिरि और महिपाल मकराना जैसे बड़े नाम शामिल हैं। प्रशासन ने इन सभी को उनके ठिकानों पर ही रोक दिया ताकि वे आंदोलन में शामिल न हो सकें।

बताया जा रहा है कि आंदोलनकारियों ने रामलीला मैदान और जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी, जिसे प्रारंभ में प्रशासन की ओर से मंजूरी भी दे दी गई थी। लेकिन बाद में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इस अनुमति को अचानक निरस्त कर दिया गया।

आंदोलन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि प्रशासन ने मीडिया को भी इन नजरबंद नेताओं से मिलने की अनुमति नहीं दी। इससे आंदोलन से जुड़ी जानकारी बाहर आने में बाधा उत्पन्न हुई है।

UGC की नीतियों के खिलाफ चल रहा यह आंदोलन पिछले कुछ समय से देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। आंदोलनकारी सरकार से मांग कर रहे हैं कि संबंधित नीतियों को तुरंत वापस लिया जाए।

वहीं प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। फिलहाल पूरे मामले पर सरकार की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है।

इस घटनाक्रम के बाद आंदोलन से जुड़े संगठनों ने सरकार के फैसले की आलोचना की है और कहा है कि शांतिपूर्ण विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है।

International

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UGC Role Back आंदोलन: 7 मार्च को प्रशासन ने कई संतों और नेताओं को किया नजरबंद

रामलीला मैदान और जंतर-मंतर पर प्रस्तावित शांतिपूर्ण धरना रद्द, मीडिया को मिलने की अनुमति नहीं

8 मार्च: UGC Role Back आंदोलन को लेकर बड़ा एक्शन, कई संत और नेता नजरबंद

नई दिल्ली। UGC Role Back आंदोलन को लेकर देशभर में बढ़ती हलचल के बीच प्रशासन ने 7 मार्च को बड़ा कदम उठाते हुए कई प्रमुख संतों और आंदोलन से जुड़े नेताओं को नजरबंद कर दिया। सूत्रों के अनुसार प्रशासन ने आंदोलन के संभावित विस्तार को देखते हुए यह कार्रवाई की।

नजरबंद किए गए प्रमुख व्यक्तियों में डॉ. राज सखावत महाराज, आनंद स्वरूप महाराज, आनंदगिरि और महिपाल मकराना जैसे बड़े नाम शामिल हैं। प्रशासन ने इन सभी को उनके ठिकानों पर ही रोक दिया ताकि वे आंदोलन में शामिल न हो सकें।

बताया जा रहा है कि आंदोलनकारियों ने रामलीला मैदान और जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी, जिसे प्रारंभ में प्रशासन की ओर से मंजूरी भी दे दी गई थी। लेकिन बाद में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इस अनुमति को अचानक निरस्त कर दिया गया।

आंदोलन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि प्रशासन ने मीडिया को भी इन नजरबंद नेताओं से मिलने की अनुमति नहीं दी। इससे आंदोलन से जुड़ी जानकारी बाहर आने में बाधा उत्पन्न हुई है।

UGC की नीतियों के खिलाफ चल रहा यह आंदोलन पिछले कुछ समय से देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। आंदोलनकारी सरकार से मांग कर रहे हैं कि संबंधित नीतियों को तुरंत वापस लिया जाए।

वहीं प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। फिलहाल पूरे मामले पर सरकार की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है।

इस घटनाक्रम के बाद आंदोलन से जुड़े संगठनों ने सरकार के फैसले की आलोचना की है और कहा है कि शांतिपूर्ण विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है।

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