Saturday, May 30, 2026

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गाज़ियाबाद में करंट लगने से घायल बंदर की मौत | नगर निगम और वन विभाग की लापरवाही से गई मासूम जान

काशी राम पुल के पास शाम 5 से 7 बजे के बीच हुआ हादसा, विभागों के बीच तालमेल की कमी के कारण नहीं बचाई जा सकी जान

गाज़ियाबाद। जनपद गाज़ियाबाद के काशी राम पुल हिंदन के पास मंगलवार शाम करीब 5.00 बजे से 7.00 बजे के बीच एक बंदर बिजली के करंट की चपेट में आने से गंभीर रूप से जख्मी हो गया, जो बाद में दम तोड़ गया। इस दर्दनाक घटना ने स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश और आश्चर्य पैदा कर दिया क्योंकि बचाव और समन्वय की कमी स्पष्ट रूप से नजर आई। स्थानीय लोगों ने बंदर को बचाने के लिए पहले नगर निगम को

अधिकारी आशीष त्रिपाठी को जब जानकारी दी गई तो उन्होंने कहा कि यह उनका कार्यक्षेत्र नहीं है, यह वन विभाग का मामला है। वहीं जब लोगों ने वन विभाग से संपर्क किया तो वहाँ से भी यही जवाब मिला कि यह उनका काम नहीं है। दोनों विभागों के बीच इस जिम्मेदारी टालने के सिलसिले में क़ीमती दो घंटे बर्बाद हो गए।

आख़िरकार जब नागरिकों ने पुलिस विभाग को सूचना दी, तो चौकी इंचार्ज सोनू शर्मा तुरंत मौके पर पहुँचे। उन्होंने स्थानीय लोगों की मदद से स्थिति का जायजा लिया, लेकिन तब तक बंदर की मौत हो चुकी थी।

घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने स्थानीय नागरिकों की मदद से बंदर को सम्मानपूर्वक दफनाया, जिससे समाज में मानवता की मिसाल पेश हुई।

लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि भविष्य में ऐसे मामलों में त्वरित बचाव दल (रिस्क्यू टीम) का गठन किया जाए, ताकि किसी भी निर्दोष पशु या पक्षी की जान विभागीय लापरवाही के कारण न जाए।

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गाज़ियाबाद में करंट लगने से घायल बंदर की मौत | नगर निगम और वन विभाग की लापरवाही से गई मासूम जान

काशी राम पुल के पास शाम 5 से 7 बजे के बीच हुआ हादसा, विभागों के बीच तालमेल की कमी के कारण नहीं बचाई जा सकी जान

गाज़ियाबाद। जनपद गाज़ियाबाद के काशी राम पुल हिंदन के पास मंगलवार शाम करीब 5.00 बजे से 7.00 बजे के बीच एक बंदर बिजली के करंट की चपेट में आने से गंभीर रूप से जख्मी हो गया, जो बाद में दम तोड़ गया। इस दर्दनाक घटना ने स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश और आश्चर्य पैदा कर दिया क्योंकि बचाव और समन्वय की कमी स्पष्ट रूप से नजर आई। स्थानीय लोगों ने बंदर को बचाने के लिए पहले नगर निगम को

अधिकारी आशीष त्रिपाठी को जब जानकारी दी गई तो उन्होंने कहा कि यह उनका कार्यक्षेत्र नहीं है, यह वन विभाग का मामला है। वहीं जब लोगों ने वन विभाग से संपर्क किया तो वहाँ से भी यही जवाब मिला कि यह उनका काम नहीं है। दोनों विभागों के बीच इस जिम्मेदारी टालने के सिलसिले में क़ीमती दो घंटे बर्बाद हो गए।

आख़िरकार जब नागरिकों ने पुलिस विभाग को सूचना दी, तो चौकी इंचार्ज सोनू शर्मा तुरंत मौके पर पहुँचे। उन्होंने स्थानीय लोगों की मदद से स्थिति का जायजा लिया, लेकिन तब तक बंदर की मौत हो चुकी थी।

घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने स्थानीय नागरिकों की मदद से बंदर को सम्मानपूर्वक दफनाया, जिससे समाज में मानवता की मिसाल पेश हुई।

लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि भविष्य में ऐसे मामलों में त्वरित बचाव दल (रिस्क्यू टीम) का गठन किया जाए, ताकि किसी भी निर्दोष पशु या पक्षी की जान विभागीय लापरवाही के कारण न जाए।

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